Monday, December 5, 2016

मैं चाहता हूँ: Mein Chahta Hun...


माँ सरस्वती की असीम कृपा से एक स्वरचित कविता
जिसका शीर्षक है – “ मैं चाहता हूँ

चाहता हूँ कि ज़ी भर के तेरे रुख़ को देखूँ,
तेरी झील सी आँखो मे तैरना चाहता हूँ ।।
चाहता हूँ तेरे लबों पे लब रखना,
तुझको अपनी बाहों मे जकड़ना चाहता हूँ ।।
चाहता हूँ तेरे भीगें बदन को चुमू,
तेरी उलझी लट मे उलझना चाहता हूँ ।।
चाहता हूँ तेरी सोखी, तेरे भोलेपन को,
जब तू सोये, दीदार-ए-चाँद करना चाहता हूँ ।।
चाहता हूँ ख़ुदा से तुझको फिर मांगू,
तुझको सारे जहान से चुराना चाहता हूँ ।।
चाहता हूँ सितमगर तुझको इश्क़ की इंतहा तक,
तुझको अपनी इबादत बनाना चाहता हूँ ।।
चाहता हूँ तेरी मिट्टी मे मिट्टी होना,
तुझको अपनी रूह मे समाना चाहता हूँ ।।

मैं तुमको चाहता हूँ...